तरुण तेजपाल ने किया आत्मसमर्पण

2013 के यौन हमला मामले में ‘तहलका’ के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा के मापुसा में अतिरिक्त सत्र न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद तेजपाल को उत्तरी गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को तेजपाल की आत्मसमर्पण से छूट की अर्ज़ी ख़ारिज करते हुए तीन हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने इसीके साथ सज़ा और दोषसिद्धि के ख़िलाफ़ तेजपाल की अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई थी, बशर्ते वह अपना सरेंडर सर्टिफ़िकेट जमा करे।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फ़ैसले को पलटते हुए नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ़्ट में अपनी जूनियर सहयोगी के साथ सेक्सुअल असॉल्ट का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने तेजपाल को 10 साल की कड़ी सज़ा सुनाई और 10 लाख रुपये से ज़्यादा का जुर्माना लगाया, जो पीड़िता को दिया जाना था।

ट्रायल कोर्ट ने मई 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था। गोवा सरकार ने हाई कोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती दी थी।

ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों पर भरोसा किया, जिसमें सीसीटीवी फ़ुटेज और कथित घटनाओं के बाद भेजे गए ईमेल शामिल थे।

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें आरोपी को बरी करने के लिए पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाए गए थे और उसे ही दोषी ठहराया गया था।

आरोप है कि 527 से ज़्यादा पन्नों के आदेश में, ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के बजाय पीड़िता का ही ट्रायल किया और यौन हिंसा के मामले में पीड़िता के चरित्र और यौन इतिहास को सबूत के तौर पर पेश करने से जुड़े कानूनी नियमों का उल्लंघन किया। ट्रायल कोर्ट ने बचाव पक्ष को पीड़िता और अभियोजन पक्ष के गवाहों से अपमानजनक सवाल पूछने की इजाज़त दी।

पीड़िता के बयान में हर छोटी-मोटी विसंगति की बारीकी से जांच की गई, जबकि बचाव पक्ष के बयानों को पूरी तरह मान लिया गया। हाईकोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई और कहा कि पीड़िता और अभियोजन पक्ष के गवाह कड़े सवालों का सामना करते हुए अपने बयानों पर अडिग रहे।

हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता के व्यवहार के प्रति ट्रायल कोर्ट के नजरिए की भी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह ‘आदर्श पीड़ित’ की रूढ़िवादी धारणाओं के अनुसार व्यवहार करे।

हाईकोर्ट ने तेजपाल के इस बचाव को खारिज कर दिया कि आरोप जबरन वसूली या चरित्र हनन की कोशिश का हिस्सा थे। कोर्ट ने माना कि महिला पर तेजपाल का अधिकार वाला पद इस मामले में अहम था।

तेजपाल ने हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। गोवा सरकार ने अलग से तेजपाल की सज़ा को बढ़ाकर उम्र कैद करने की मांग की है और तर्क दिया है कि 10 साल की सज़ा अपराध की गंभीरता के हिसाब से कम थी।

(जनचौक ब्यूरो)

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